सड़क निर्माण में बीसीएस पेंच में सीबीआर, टेस्ट नजर अंदाज

 सड़क निर्माण में बीसीएस पेंच में सीबीआर, टेस्ट नजर अंदाज

चिचोला से छुरिया तक हो रहे करोड़ों रुपयों के सड़क निर्माण कार्य में अर्थ वर्क, कटिंग फिलिंग, जीएसबीसीएमसी डब्लुएमएम कार्य में धांधली करने का आरोप लग रहा हैं बेहद चौकाने वाला तथ्य बीसीएस पेच में सीबीआर का जो परसेंटेज, स्थल है को नजर अंदाज करने से सड़क की गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। इससे पूर्व भी पीडब्लूडी की निर्मित सड़क में भी बीसीएस पेंच में सीबीआर , प्रापर कंपेक्शन नजर अंदाज करने से सड़क धस गई थी और बार-बार मेंटनेंस करना पड़ा।
अब लगभग 58 करोड़ की लागत से सड़क विकास निगम की देखरेख में बन रहे सड़क निर्माण कार्य में बीसीएस पेच में डीपीआर में निर्धारित वर्क नहीं करने से सड़क धसकने की संभावना जताई जा रही है। आरोप है कि, पेटी ठेकेदार के भरोसेे निर्माण कार्य किया जा रहा है।
जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सिद्दीक मेमन ने कहा कि, सीबीआर टेस्ट के परसेंटेज और अनुमोदित स्थल को छोड़कर मटेरियल उपयोग करने से सड़क की स्थिति बनते ही दयनीय हो सकती है। निगम के अधिकारी व ठेकेदार डीपीआर में उल्लेखित तकनीकी नियमों को नजर अंदाज कर रहे है। लालुटोला से घोघरे तक बीसीएस पेच आ रहा है, जिसमें लालुटोला के पास लगभग 200 मीटर का पेंच है, जहां जीएसबी के बाद सीएमसी की जगह महज गिट्टी डालकर कार्य कर सड़क के निर्धारित कार्य की धज्जियां उड़ाई गई है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि, ब्लेक काटन स्वाईल पेंच में प्योर ग्रेनुलर उपयोग किया जाना था, लेकिन वहां मिट्टी मिक्श मुरूम का ईस्तमाल कर सड़क की गुणवत्ता को तार-तार कर दिया गया। श्री मेमन ने आरोप लगाया है कि बेश क्रश्ड स्टोन फिलिंग कार्य में गड़बड़ी कर सड़क निर्माण की गुणवत्ता की धज्जिया उड़ाई जा रही है। ब्लेक काटन स्वाईल साईड में जीएसबी के बाद सीएमसी की जगह अमानक क्रश्ड स्टोन क्यों डाला जा रहा है? यही नहीं नव निर्मित पुलों में हनीकोम सामने आ रहा है, जिसको दबाने के लिये सीमेंट से प्लास्टर की जा रही है इससे साबित हो रहा है कि मानक , अनुपात के अनुसार कांक्रीट मिक्शिंग , वाईबरेटर का उपयोग नहीं किया जा रहा है। उन्होंने ब्लेक काटन स्वाईल एरिया के जीएसबी कंपेक्शन और माईश्चर कंटेट की भी जांच कर कार्यवाही की मांग करते हुये कहा है कि सड़क निर्माण में की जा रही धांधली की सड़क खोदकर जांच की जानी चाहिये और ठेकेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

Source: 
Vision News Service

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