प्रत्याशी चयन के आधार पर होगी इस बार जीत-हार.

विधानसभा चुनाव में इस बार खासकर जांजगीर-चांपा सीट काफी दिलचस्प नजर आ रही है। जनता का जिस तरह रुझान आ रहा है, उसके मुताबिक हार-जीत का फैसला राजनीतिक पार्टी के बजाय इस बार प्रत्याशी चयन पर आधारित होगा। जनता इस बार बदलाव के मूड में नजर आ रही है। ऐसे में राजनीतिक दलों के आगे धर्मसंकट की स्थिति पैदा हो सकती है। अब देखना यह है कि दोनों प्रमुख दलों की ओर से किस तरह जनता के मुताबिक उम्मीदवार का चयन किया जाता है।
बीते 40 सालों का इतिहास देखा जाए तो पहले चांपा और अब जांजगीर-चांपा विधानसभा सीट पर दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। पूर्व केंद्रीय मत्री डॉ. चरण दास महंत के अलावा किसी भी उम्मीदवार ने दोबारा जीत हासिल नहीं की है। इस लिहाज से इस बार यह सीट भाजपा के खाते में जाएगा, लेकिन वर्तमान में हालात बदल गए हैं। पहले की अपेक्षा यहां की जनता काफी जागरूक हुई है। दो नगरपालिका और एक नगर पंचायत वाले जांजगीर-चांपा विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 12 लाख 38 हजार 613 है। इनमें 6 लाख 33 हजार 763 पुरूष हैं तो महिला मतदाताओं की संख्या 6 लाख 4 हजार 850 है। इन मतदाताओं का मन इस बार बदला-बदला है। कुछ मतदाताओं से बातचीत करने पर पता चला कि इस बार पार्टी के बजाय जीत-हार के लिए प्रत्याशी काफी महत्वपूर्ण है।
आपको बता दें कि जांजगीर-चांपा विधानसभा सीट में भाजपा और कांग्रेस से दर्जनों दावेदार हैं। अब इन दावेदारों में जनता की पसंद का उम्मीदवार चयन करना राजनीतिक दलों के लिए टेढ़ी खीर है। हालांकि जनता के पल-पल का रूझान लेने राजनीतिक दलों के अलावा एलआईबी की टीम तैनात है।
क्या सभी सीटों में भाजपा आएगी!
भाजपा इस बार प्रदेश में मिशन 65 प्लस लेकर काम कर रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जांजगीर आना भी इसी मिशन का अभिन्न अंग है। भाजपा हर हाल में जिले के सभी छह सीटों पर कब्जा जमाना चाहती है। लेकिन यह इतना आसान नहीं है। जांजगीर-चांपा जिले के सभी 6 विधानसभा सीटों में हमेशा से बसपा का भी अच्छा-खासा प्रभाव रहा है। खासकर पामगढ़ को हमेशा से बसपा का गढ़ माना जाता है। हालांकि काफी जोर आजमाइश के बाद वर्ष 2013 में पहली बार भाजपा के अंबेश जांगड़े विजयी हुए थे। जबकि जैजैपुर सीट से बसपा के केशव चंद्रा ने बाजी मारी थी।
इधर, कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का भी खासकर पामगढ़ में शुरू से अच्छा प्रभाव रहा है। गठबंधन के बाद इस सीट पर इन्हीं का कब्जा होने की बात कही जा रही है। जबकि जैजैपुर में भी कांटे की टक्कर रहेगी। अन्य सीटों को लेकर प्रत्याशी चयन और उम्मीदवार बनाने के बाद नाखुशों को पक्ष में करना भी काफी अहम होगा।

Source: 
visionnewsservice.in

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