Jagdalpur

CG-17, Jagdalpur

एक लाख रुपए के इनामी समेत 2 नक्सलियों ने किया सरेंडर

एक लाख रुपए के इनामी समेत 2 नक्सलियों ने किया सरेंडर

सीआरपीएफ 80वीं बटालियन कैंप में आज 2 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया. नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताते हुए आत्मसमर्पण कर दिया.

दोनों नक्सली करकाबेड़ा और एलजीएस कमेटी के सदस्य हैं. दोनों नक्सलियों के नाम रामू उसेंडी और बुधराम हैं. इन्होंने सीआरपीएफ कमांडेंट अमिताभ कुमार, एसपी आरिफ शेख के सामने सरेंडर किया.

सरेंडर किए दोनों नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 10-10 हजार रुपए और घरेलू सामान दिया गया.

गौरतलब है कि एक नक्सली रामू उसेंडी पर 1 लाख रुपए का इनाम था. दोनों नक्सली कई वारदातों में शामिल थे.

शारदीय नवरात्र की अष्टमी को दंतेवाड़ा से मां की डोली जगदलपुर के लिए होगी रवाना

शारदीय नवरात्र की अष्टमी को दंतेवाड़ा से मां की डोली जगदलपुर के लिए होगी रवाना

75 दिनों तक मनाया जाने वाला ऐतिहासिक बस्तर दशहरा दुनियाभर में प्रसिद्ध है. इस दौरान सभी रस्म-रिवाज भी बेहद महत्वपूर्ण हैं. इसके रस्म-रिवाज बस्तर दशहरे को एक अलग ही पहचान देती है. मां दंतेश्वरी की छत्र और डोली नवमी तिथि को दंतेवाड़ा से जगदलपुर पहुंचती है. इसका भव्य स्वागत किया जाता है. इस रस्म को मावली परघाव के नाम से जानते हैं.

मावली परघाव

रियासतकाल में हाथी-घोड़े के साथ दंतेवाड़ा से पैदल रवाना होती थी मांईजी की डोली

विश्व प्रसिद्ध ऐहतिहासिक बस्तर दशहरा में छह दशक पहले शामिल होने दंतेवाड़ा से मावली माता की डोली को जगदलपुर पहुंचने में करीब चार दिन का समय लगता था। मांईजी की पालकी के साथ हाथी-घोड़ा पुजारी, सेवादार, समरथ, मांझी, चालकी समेत 12 परघना के लोग पैदल दंतेवाड़ा से जगदलपुर रवाना होते थे। दंतेवाड़ा मंदिर के मुख्य पुजारी हरेंद्र नाथ जिया ने बुधवार को कहा कि, अब मोटर गाड़ी के जमाने में मांईजी की पालकी एक दिन में ही जगदलपुर पहुंच जाती है।
00 गांव-गांव में होता था पूजन :

नगरनार के विनिवेशीकरण के विरोध में मजदूरों ने किया अधिकारियों का घेराव

मजदूरों ने किया अधिकारियों का घेराव

जगदलपुर स्थित नगरनार स्टील प्लांट को बेचने के विरोध में बुधवार सुबह मजदूर संगठनों ने काम शुरु करने के पूर्व अधिकारियों को घेरा। संयुक्त इस्पात मजदूर संगठन और स्टील श्रमिक यूनियन नगरनार ने एनएमडीसी के नए नियुक्त सीएमडी के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम से स्टील प्लांट नगरनार को सार्वजनिक उपक्रम में ही बने रहने की सिफारिश नीति आयोग से करने का निवेदन किया गया है।
00 आंदोलन का कोई असर नहीं हो रहा केंद्र सरकार पर : जॉन

छिन्दगढ़ की गीता बृज बनी सिविल जज

छिन्दगढ़ की गीता बृज बनी सिविल जज

सुकमा जिला के ग्राम बारसेरास छिन्दगढ़ निवासी गीता बृज का सिविल जज के लिए चयन हुआ है। पीएससी के सिविल जज भर्ती परीक्षा के मेरिट में छत्तीसवें स्थान पर उनका चयन हुआ है। गीता बृज का सिविल जज बनना बस्तर संभाग के युवाओं के लिए यह गौरव का क्षण है।

पुरस्कारों के लिए आवेदन 26 तक

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से दिए जाने वाले राज्य स्तरीय पुरस्कारों के लिए 26 सितम्बर तक आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं। शासन ने राज्य स्तरीय पुरस्कार अंतर्गत पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान, यतियतन लाल सम्मान और आखिल भारतीय पुस्कार अंतर्गत महाराजा अग्रसेन सम्मान के लिए योग्य व्यक्तियों से आवेदन पत्र जिला कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करने कहा है। इसके लिए जिला स्तर पर आवेदन पत्रों का संकलन कर शासन को प्रेषित किया जाएगा। निर्धारित तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

मंत्रियों का समूह करेगा नगरनार स्टील प्लांट के विनिवेशीकरण का फैसला

नगरनार में निर्माणाधीन एनएमडीसी के स्टील प्लांट का विनिवेशीकरण अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है। विनिवेश के लिए ट्रांजेक्शन और लीगल एडवाईजर, एसेट वेलुएशन का काम समाप्त होने ही वाला है। यह विनिवेशीकरण केन्द्र सरकार की ओर से गठित मंत्रियों का समूह करेगा। विनिवेश की प्रक्रिया का निर्धारण भी केन्द्र सरकार करेगी।
इस संबंध में गत दिनों एनएमडीसी के मुख्यालय हैदराबाद में हुई वार्षिक सामान्य सभा में सीएमडी ने कहा कि, विनिवेशीकरण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने कोलकाता, मुंबई और नोएडा की कंपनियां काम कर रही हैं।

इस साल हवाई जहाज में नहीं उड़ पाएंगे बस्तरवासी

संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से यात्री विमान सेवा शुरू करने की आवश्यक तैयारियां अभी तक पूर्ण नहीं हो पाई हैं। संभावना व्यक्त की जा रही है कि,अब यह हवाई सेवा अगले वर्ष ही शुरू हो पाएगी। निर्माण कार्यों में देरी के कारण यह अनुमान लगाया गया है।

मावली मंदिर में 9 दिनों तक पुरुषों का प्रवेश निषेध

बस्तर दशहरा पर्व के दौरान मावली मंदिर में नौ दिनों तक अनुष्ठान के दौरान पुरुषों का प्रवेश निषेध होता है। दो समाजों की 12 सुहागिन महिलाएं गौरा-गौरी की विधि पूर्वक पूजा करती हैं। दिलचस्प बात यह है कि, पूजा के दौरान कक्ष का कपाट बंद रहता है और पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। 9 दिनों के अनुष्ठान उपरांत महिलाओं की ओर से स्थापित कलश व प्रतिमा का नवमीं तिथि को विसर्जन किया जाता है।
00 रियासतकाल में महिलाएं रानी को खिलाती थीं प्रसाद :

बस्तर दशहरा : जोगी बिठाई रस्म हुई

बस्तर दशहरा : जोगी बिठाई रस्म हुई

बस्तर दशहारा को निर्विघ्न पूरा करने तप और साधना के लिए गुरुवार शाम सिरहासार भवन में जोगी को विधि विधान से बैठाया गया। इस बार यह जिम्मेदारी ग्राम बड़े आमाबाल के रघुनाथ को मिली है। वे पहली बार जोगी के रूप में साधना करेंगे। इस दौरान पिछले वर्ष बैठे उसके मामा भगत देखरेख में साथ-साथ रहेंगे। इससे पहले रघुनाथ ने राजमहल और मां दंतेश्वरी का आशीर्वाद लिया। इस दौरान जोगी पूरे 9 दिन उपवास में काली चाय के सेवन करते है। आराध्य माता दंतेश्वरी की कृपा से 4 बाई 6 के भूमिगत गड्ढे में 9 दिन रहना पड़ता है।